अशकों में जेसे धुल गए सब मुसुकुराते रंग ,
रासते में थक के सो गयी मासूम सी उमंग,
दिल हे की फीर भी ख्वाब सजाने का शोख हे ,
पत्थर पे भी गुलाब उगने का शोख हे ,
बरसो से यूं तो एक अमावस की रात हे ,
अब इसको होसला कहू ये जीद की बात हे ,
दील कहेता हे अँधेरे में भी रौशनी तो हे ,
माना की राख हो गयी उम्मीद के अलावा,
इस राख में भी आग कही पर तपी तो हे ....
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