Tuesday, July 7, 2009

तरस

तारे आसमान में रहकर भी चमकते हे !

बदल दूर हे फिर ही बरसते हे!

हम भी कितने नादान हे,,

आप हमरे दिल में रहेते हो फिर भी मिलने को तरसते हे

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